Nagpura Mahotsav:

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    23rd Teerthankar Lord Shri Parshwanath
    SHRI UWASAGGAHARAM PARSHWA TIRTH
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    श्री महावीर स्वामी कमल जिनालय [LOTUS TEMPLE]
    प्राकृतिक उपहारों से सुसज्ज आने वाले कल को सौगात तीर्थंकर उद्यान.
    24 तीर्थ दर्शन उद्यान शाश्वत जिन मंदिर.
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    Shri Shashvat Jin Mandir
    श्री शाश्वत जिन मंदिर उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ में
    शाश्वत जिन बिम्ब
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Our History

23rd Teerthankar Lord Shri Parshwanath commemorates his holy visit to this region about 3000 years ago as a Shraman ...

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नगपुरा स्वर्णिम महामहोत्सव 2017

पधारिये, श्री पार्श्वनाथ प्रभु की श्रमणकालीन तपोभूमि के तीर्थोद्धार का स्वर्णिम महामहोत्सव 10 से 14 दिसंबर 2017 तक. नगपुरा महोत्सव में आप सभी आमंत्रित हैं |

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Our Seva Sansadhan

Shri Manickchand Dhariwal guesthouse (AC), Bhinmal guesthouse & Pdmaben Kalidasshah guesthouse is available ...

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श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ

तीर्थोद्धार मार्गदर्शक प्रतिष्ठाचार्य

Chhattisgarh Jain Tirth

Shri Uwassaggaharam Parshwa Tirth

तपोभूमि श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ

एतिहासिक प्राचीन इस आस्थामयी देहरी मंदिर जो सह भव्य तीर्थोद्धार खंडहर होती गई का पुनः सन् 1979 में धर्मनिष्ठ दुगड़ गोत्रीय रावलमल जैन ‘मणि’ दुर्ग निवासी ने स्वप्न निर्देशानुसार जीर्णोद्धार एवं भव्य तीर्थोद्धार के कार्य का बीड़ा उठाया और आज भव्य सप्तशिखरमय मंदिरावली के साथ महाप्रभाविक श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ देदीप्यमान कराया।
संवत् 2059 (सन् 1995) में पू. आत्मकमल लब्धि-विक्रम गुरु कृपा पात्र पू.आ.श्री राजयश सूरी म.सा. के मार्गदर्शक में मव्य निर्माण पूरा हुआ और पूज्यश्री निश्रा में की श्री उवसग्गहरं पार्श्व जिनालय की प्रतिष्ठा हुई। अधिक जानकारी ...

तीर्थदर्शन उद्यान संरचना

श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ नगपुरा ने तीर्थोद्धार-जीर्णोद्धार की एतिहासिक गरिमामय गाथा लिखते हुए अपने सर्वोदयी विश्वास विशाल जनमानस में स्थापित किया है। तीर्थ परिसर के विशाल भू-भाग में तीर्थकर उद्यान निर्मित है |
यहाँ परम तारक देवाधिदेव श्री ऋषभदेव प्रभु से लेकर शासनपति श्री महावीर स्वामी तक 24 तीर्थकर परमात्माओं को जिन वृक्षों के नीचे केवल ज्ञान प्राप्त हुआ वह वृक्ष रोपित किया गया है। प्रत्येक परमात्मा की केवलज्ञान मुद्रा में प्रतिमा प्रतिष्ठित है। अधिक जानकारी ...

शाश्वत मेरू पर्वत

भारत का पहला मेरूपर्वत उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ में निर्मित हुआ है। मुख्य मंदिर के ठीक पीछे शाश्वत मेरू पर्वत गुफा सहित जिनालय बनाया गया है जो इस तीर्थ के समर्पित शिल्पी श्री मणि सा. के दूरदृष्टा होने का प्रतीक है। तीर्थ अंजनशलाका विधान अनुसार अस्थायी मेरूपर्वत बनाया जाना था।
श्री मणि जी ने तत्काल मुख्य मंदिर निर्माण से बचे हुए पत्थरों से जो अनुपयोगी था कारीगरों से अपनी ही देखरेख में शाश्वत मेरु पर्वत की रचना करायी। ऊपर देहरी निर्मित कर श्री पार्श्व प्रभु जी की धातु प्रतिमा तथा गुफा में चैबीस तीर्थकर परमात्माओं की प्रतिष्ठा हुई है। अधिक जानकारी ...

नगपुरा महोत्सव

देवाधिदेव श्री पार्श्व प्रभु के जन्म-दीक्षा कल्याण अवसर पर तीर्थ में देशभर के हजारों श्रद्धालु अट्ठम तप आराधनार्थ पधारते हैं। तीर्थ परिसर के विशाल भू-भाग नगपुरा महोत्सव (मेला) का आयोजन होता है।
5 दिवसीय आयोजन में अंचल के ग्रामीण स्वस्फूर्त पार्श्व प्रभु की भक्ति से जुड़ते है। इस अवसर पर परम्परागत आंचलिक संस्कृति के अनुसार लोकगीत-नृत्य-संगीत एवं झांकी साज सज्जा के साथ आत्मिक आनंद से परमात्मा भक्ति में भाव विभोर हो धन्यता का अनुभव करते हैं। अधिक जानकारी ...
Visit Website www.nagpuramahotsav.com

Location and Brief History

23rd Teerthankar Lord Shri Parshwanath commemorates his holy visit to this region about 3000 years ago

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DEHRI stood the pious footprints of Parshwa- Prabhu was mutilated by the impact of time

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Lord Parshwanath was first named as "UWASAGGHARAM" as per Bhadrabahu Samhita ppp.38.Vo1,111

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श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ

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